एक मरीज पर खर्च किए जा रहे 13 लाख रुपए,  फिर भी बढ़ रहे हैं टीबी के मरीज

एक मरीज पर खर्च किए जा रहे 13 लाख रुपए,  फिर भी बढ़ रहे हैं टीबी के मरीज
विश्व टीबी दिवस आज

अनदेखी... प्रदेश के टॉप-5 जिलों में सबसे ज्यादा रोगी इंदौर में 
विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस मंगलवार को है। भारत सरकार द्वारा टीबी के उन्मूलन के लिए विभिन्न शासकीय योजना चलाई जा रही हैं, जिसमें मरीजों को नि:शुल्क उपचार के बाद अतिरिक्त वित्तीय लाभ भी दिया जा रहा है। यहां तक कि उपचार की दवाइयां घर-घर पहुंचाई जा रही हैं। इन तमाम प्रयासों के बावजूद भी टीबी के रोगियों की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है। बीच में दवा छोड़ने वाले मरीजों को फिर से इलाज शुरू करने पर उन पर टीबी की दवा का असर नहीं होता है। ऐसे मरीजों को मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) कहा जाता है। इन मरीजों के इलाज के लिए बेडाक्युलिन दवा दी जा रही है। एक एमडीआर मरीज के टीबी का कोर्स पूरा करने का खर्च 13 लाख रुपए है। सरकार अब तक इंदौर जिले में 18 मरीजों पर 2.34 करोड़ रु. खर्च कर चुकी है।

पांच साल पहले सालाना 7 हजार मरीज थे, अब 13 हजार पार 
कुल मरीज 49170
प्रदेश  के पांच जिले जिनमें सर्वाधिक 
टीबी रोगी 
इंदौर     - 49170
भोपाल     -40159
ग्वालियर     -37898
छतरपुर     -35590
जबलपुर     -26779
इंदौर में बीते पांच वर्षों में दर्ज हुए टीबी मरीज  

2015 7531
2016 7839
2017 9355
2018 11422
2019 13023
छुआछूत का रोग मानते हैं, इसलिए घर पहुंचा रहे दवा 

केंद्र सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के तहत फरवरी से टीबी मरीजों के घर दवाइयां भेजना शुरू किया है। अभी तक 12 लोगों की दवाइयां पहुंचा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2025 तक टीबीमुक्त भारत है। मरीजों को कई बार दवा लेने में झिझक महसूस होती है, क्योंकि हमारे देश में आज भी टीबी को छुआछूत का रोग माना जाता है, लिहाजा हमने घर में दवाइयां पहुंचाना शुरू की है। 
- डॉ. बीएल कौशल, 
क्षय रोग अधिकारी, इंदौर  
हाइलाइटर प्वॉइंट्स 
टीबी के कारण एक लाख महिलाओं को उनके परिवार द्वारा त्याग दिया जाता है। 
 टीबी के कारण 3 लाख बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ता है।
 एक क्षय रोगी सालभर में 10 से 15 स्वस्थ्य लोगों को संक्रमित करता है।