भोपाल के प्रतीक हजेला ने पूरा किया एनआरसी मिशन

भोपाल के प्रतीक हजेला ने पूरा किया एनआरसी मिशन

भोपाल ।  देशभर में नेशनल रजिस्ट्रर आॅफ सिटीजन (एनआरसी) की अंतिम रिपोर्ट को लेकर हल्ला हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह माने जा रहे हैं असम-मेघालय कैडर के 1994 बैच के आईएएस प्रतीक हजेला। जिसे एनआरसी की रीढ़ कहा जाना मुनासिब होगा। प्रतीक के नेतृत्व में ही एनआरसी की प्रक्रिया पूरी की गई है। प्रतीक हजेला की चर्चा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वे मप्र के हैं। 48 वर्षीय आईएएस भोपाल के रहने वाले हैं। प्रतीक के पिता एसपी हजेला मप्र लोक सेवा आयोग के अफसर रहे हैं। उनके छोटे भाई डॉ. अनूप हजेला भोपाल के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं। उनका एक निजी अस्पताल भी है। उनके चाचा पीडी हजेला चर्चित अथर्शास्त्री थे और वे प्रतिष्ठित इलाहाबाद और सागर विवि के वाइस चांसलर भी रहे हैं। हालांकि किन्हीं कारणों से प्रतीक हजेला से चर्चा नहीं हो सकी है। 1996 में सहायक आयुक्त: आईआइटी दिल्ली से 1992 में इलेक्ट्रॉनिक्स में बी-टेक किया है। 1994 में प्रतीक भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचे। 1996 में असम में काचर के सहायक आयुक्त बनाए गए थे। स्पेशल कमिश्नर नियुक्त कर इमरजेंसी आॅपरेशन की ड्यूटी पर तैनात किया गया। बेहद पारदर्शी ढंग से 5000 सिपाहियों की भर्ती की थी, जिस पर उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था। सितंबर 2013 में वह कमिश्नर बनाए गए। इसके बाद उन्हें एनआरसी का राज्य समन्वयक बनाया गया।

19 लाख लोगों को किया एनआरसी से बाहर

असम सरकार ने एनआरसी की फाइनल लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 19 लाख लोग अपनी जगह नहीं बना पाए हैं। एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला के नेतृत्व में टीम ने 3,11,21,004 लोग इस लिस्ट में जगह बनाने में सफल हुए हैं। जबकि एनआरसी की फाइनल लिस्ट से 19,06,657 लोग बाहर हो गए हैं। सूची में शामिल न हो पाने वालों को दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए पूरा मौका दिया जाएगा।

55 हजार अधिकारियों की टीम का नेतृत्व कर रहे प्रतीक

तत्कालीन कांग्रेस सरकार की सिफारिशों पर सितंबर 2013 में एनआरसी का स्टेट को-आर्डिनेटर नियुक्त किया गया था। जब प्रतीक राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में प्रबंध निदेशक के तौर पर कार्य कर रहे थे। प्रतीक के नेतृत्व में 55,000 अधिकारियों की टीम ने असम के करोड़ों लोगों के दस्तावेजों की जांच की। एनआरसी की पूरी प्रक्रिया में 1,200 करोड़ रु. का खर्च आया है।

एनआरसी का आधार बना ट्रिपल डी

एनआरसी में शामिल होने की पहली पहली शर्त थी कि व्यक्ति को असम और देश का वाजिब नागरिक तभी माना जाएगा, अगर वो 31 जुलाई 1971 से (बंग्लादेशी बनने से पहले) असम में रह रहा हो। इसके लिए उसे 14 तरह के प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने थे। एनआरसी अपडेशन के आधार मुख्य तौर पर तीन डी हैं -डिटेक्शन (पता लगाना), डिलीशन (नाम हटाना) और डिपोर्टेशन (वापस भेजना)।