बिल्डर ने अनरजिस्टर्ड डीलर से लिया 20 फीसदी से ज्यादा माल तो देना पड़ेगा 18 फीसदी टैक्स

बिल्डर ने अनरजिस्टर्ड डीलर से लिया 20 फीसदी से ज्यादा माल तो देना पड़ेगा 18 फीसदी टैक्स

इंदौर। रियल एस्टेट कंपनियां 1 अप्रैल के बाद अपने हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए अगर अनरजिस्टर्ड डीलर से 20 फीसदी से अधिक माल या सेवा लेती हैं तो उन्हें 18 फीसदी टैक्स आरसीएम के तहत देना होगा। इतना ही नहीं, अनरजिस्टर्ड डीलर से सीमेंट लेने पर इन्हें 28 फीसदी टैक्स देना होगा। दरअसल, सरकार ने 1 अप्रैल से हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को लेकर जीएसटी के नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत शहर में बन रहे या बन चुके μलैट की बिक्री को लेकर बिल्डर्स को तय करना है कि वह उन पर टैक्स की दर 12 फीसदी रखते हुए इनपुट क्रेडिट लेना चाहते हैं या नई दर पांच और एक फीसदी से टैक्स देना चाहते हैं। यह जानकारी इंदौर सीए ब्रांच के रियल एस्टेट टैक्सेशन पर आयोजित सेमिनार में मुंबई के जीएसटी विशेषज्ञ सीए नरेश सेठ ने दी। सेठ ने बताया कि रियल एस्टेट कंपनियां चालू प्रोजेक्ट्स पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ अपने आप को जीएसटी के पुराने ढांचे के तहत अपने को बनाए रखने के बारे में 10 मई तक संबंधित अधिकारियों को सूचना दे सकती हैं। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने इस क्षेत्र के लिए संशोधित जीएसटी ढांचे को अपना लिया है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल के बाद से रियल एस्टेट में हाउसिंग प्रोजेक्ट पर बिल्डर्स को 80 फीसदी माल एवं सेवाओं की सप्लाई रजिस्टर्ड डीलर से करना होगी। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें 18 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। सेमिनार में इंदौर सीए ब्रांच के चेयरमैन पंकज शाह ने बताया कि प्रॉपर्टी के ट्रांजेक्शन में इन सभी कानून को ध्यान में रखना है। 

व्यापार के अलावा नहीं ले सकते एडवांस

सेमिनार में सीए राजेश संघवी ने बताया कि अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम आॅर्डिनेंस 21 फरवरी 2019 से लागू हुआ है। इस आॅर्डिनेंस के तहत किसी भी प्रकार का एडवांस या डिपॉजिट या लोन व्यापार के अलावा नहीं लिया जा सकता है। अगर उस लोन का उपयोग व्यापार के लिए नहीं किया गया है तो उसे ड्यू डेट से 15 दिनों में लौटाना होगा अन्यथा आॅर्डिनेंस का उल्लंघन माना जाएगा। यह उल्लंघन एक गैर जमानती अपराध है और इसके लिए न्यूनतम एक वर्ष से अधिक की सजा हो सकती है। उन्होंने बताया कि अगर किसी बिल्डर ने बुकिंग एडवांस लिया और उसका प्लान बाद में अप्रूव नहीं हुआ और परमिशन नहीं मिली तो डिपॉजिट लेने की तारीख से इसे उल्लंघन माना जाएगा और इसे रेरा के तहत भी अपराध माना जाएगा। इस आॅर्डिनेंस के कारण बीसी/ किट्टी ग्रुप में सामूहिक योगदान से कलेक्शन भी अवैध माना जाएगा।