ध्रुपद सुरों से हुआ सुबह का आगाज और कथक के 1500 चक्करों के साथ समापन

ध्रुपद सुरों से हुआ सुबह का आगाज और कथक के 1500 चक्करों के साथ समापन

आईएम भोपाल। संस्कृति विभाग द्वारा महाशिवरात्रि पर्व पर भोजपुर शिव प्रांगण में भोजपुर महोत्सव सोमवार को आयोजित किया गया, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह तीन दिवसीय उत्सव एक दिन में सुबह से लेकर शाम तक चले आयोजनों में सिमट कर रह गया। इस का बड़ा कारण यह है कि वर्ष 1993 से 2003 तक सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस ने इस पर रोक लगा दी थी। सन 1990 में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा ने भोजपुर महोत्सव की शुरूआत की थी। इसके बाद 1993 में जब सत्ता से भाजपा जाने के बाद सत्ता में आई कांग्रेस ने इस महोत्सव में खास रुचि नहीं दिखाई। कांग्रेस के शासनकाल में 10 वर्षों तक यह महोत्सव बंद रहा। सन 2003 में भाजपा पुन: सत्ता में आई। 2005 से इस आयोजन को फिर शुरू किया जाने लगा। जो तब से 2018 तक निरंतर जारी रहा। बहरहाल सोमवार की शिव मंदिर में हुई प्रस्तुतियों की बात करें तो शाम को कथक नृत्यांगना वी अनुराधा सिंह पंद्रह शिष्याओं के साथ एक घंटे बीस मिनट की प्रस्तुति दी। उन्होंने शारदा भजन, गंगावतरण, राधा का लास्य, कालिया मर्दन, गोवर्धन लीला आदि ग्यारह रचनाओं को उन्होंने प्रस्तुत किया। शास्त्रीय रागताल में निबद्ध इन रचनाओं में कलाकारों ने लगभग 1500 चक्करों का प्रदर्शन किया। वहीं मालवा के लोकगायक बाबूलाल धौलपुरे ने दोपहर में लोक संगीत की प्रस्तुति दी।

शिव वंदना के साथ हुआ सुबह का आगाज

आज सुबह से शुरू हुए इस महोत्सव में लोककलाओं की सहभागिता के साथ ही भक्ति संगीत और शास्त्रीय प्रयोगों को महत्व मिला जब आरम्भ ध्रुपद स्वर में शिव वंदना से हुआ। यह प्रस्तुति ग्वालियर के कलाकार एवं ध्रुपद गुरु अभिजीत सुखदाणे एवं शिष्यों ने प्रस्तुत किया। इसी क्रम में उज्जैन के शर्मा बंधु की वंश परंपरा के होनहार गायक आंजनेय शर्मा ने अनेक भजन सुनाकर आनंद प्रदान किया। इसी मंच पर ग्वालियर के कलाकार श्याम शंकर माहौर और उनके साथियों ने ताल वाद्य का बखूबी प्रदर्शन किया।

दोपहर में लोक संगीत

मालवा के लोकगायक बाबूलाल धौलपुरे ने दोपहर में लोक संगीत में विभिन्न देव वंदनाएं प्रस्तुत कीं। इसके बाद बुंदेलखंड के बरेदी और निमाड़ के काठी नृत्यों की पूरे परिसर में निकली प्रतीकात्मक शिव बारात यात्रा को हजारों दर्शनार्थियों ने देखा और इसका हिस्सा बने।